नागालैंड के कलाकार जानेंगे बुंदेलखंड की संस्कृति

सागर। नागालैंड उस संस्कृति को अपनाए हुए है, जिसमें सिर्फ पहनावे से उनके कबीलों या इलाकों की पहचान हो जाती है। यह बात डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि में भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत स्वर्ण जंयती सभागार में नागालैंड व बुंदेलखंड की संस्कृति साझा के उद्घाटन के दौरान विवि के कुलपति प्रो. आरपी तिवारी ने कही। नागालैंड विवि के 40 सदस्यीय दल में आए कलाकारों का स्वागत किया। इस मौके पर नागालैंड विवि की प्रो. राधा रानी, नोडल अधिकारी म्ठैठ पीट, कोराडीनेटर सोमनाथ चक्रवर्त्‌ती ने भी विचार रखे। पहले दिन अंचल की कलाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां हुई। कार्यक्रम समन्वयक राकेश सोनी ने बताया कि 1 मार्च से 6 मार्च तक आयोजित इस आयोजन में एक शादी का आयोजन भी किया जा रहा है। जिसमे बुन्देलखण्ड अंचल की सभी परम्पराओं, खान, पान, लोक गीत और पहनावा आदि को बताया जाएगा।